किताबों की दुनिया में पैदा होकर हम सब भाग्यशाली हुए क्यों की बचपन में पंचतंत्र और एसोप की कहानियां हम सब ने पढ़ी और सुनी हुई है।ये कहानियां लिखी तो गयी थी बच्चों के लिए मगर इससे सीख हम बड़े भी ले सकते है चाहे हम ने अपना बचपन कितने ही पीछे छोड़ा हो।हर एक कहानी के अखिड़ में एक नीति लिखा होता था।सच में वो सारी कहानियां और उनके नैतिकता आज भी मेरे दिल में बैठे हुए है।कहने को तो वो बच्चों के लिए था मगर आज हम सब जिस दौर से गुज़र रहे है,लगता है हम सबको वो सारी कहानियां दोबारा पढ़नी चाहिए।सीखनी चाहिए उनके पीछे लिखी हुई वो नीति दोबारा ता की हम दूसरों को नहीं,वल्कि अपने आप को सीखा सके,के उन सब किरदारों का हम पर प्रभाव कितना बड़ा है।
हम में से बहुत लोग सोचते है वो सब कहानियां सिर्फ बच्चों का दिल बहलाने के लिए लिखी गयी थी और क्यों की अब हम बड़े हो गए इसलिए अपने आप को बड़ा समझदार मान कर उन कहानियों को भुला देते है।बड़े तो हम ज़रूर हुए है मगर बड़े होने का सूझ बूझ अभी आना बाकी है।सबसे अहम तो ये है कि अगर हम अपनी बच्चों को सिखाये तो क्या सिखाएंगे?इसलिए जरूरी है कि हम उन कहानियों को फिर से पड़े और उनसे सीखे नैतिकता किसे कहते है।
प्राचीन काल में रामायण और महाभारत लिखी गयी थी।सच में इतने बड़े महा काव्य लिखने का काम किसी आम लोगों की बस में नहीं था।इसलिए उन्हें आज भी पढ़ा और समझा जाता है।कुछ लोग मूवी देखना पसंद करते है और उनमें से ज्यादातर लोग उन मूवी से सिर्फ गलत चीजें सीख कर आते है।बच्चों के लिए भी ऐसे मूवी आते है जिन्हें वो बड़े धीरज और लगन से देखते है।उनमें से कितने बच्चे सही सीखते है और कितने गलत इस बात का अंदाज़ा मुझे नहीं है।मगर गली महल्ले से गुज़रते समय यह अनुमान लगा सकती हूँ की सच में हम सब की शिक्षा अभी अधूरी है।
बचपन में जिन लोगों को अच्छी शिक्षा और संस्कार मिले है अगर हम उन में से चंद लोगों से भी मिलेंगे तो हमे इस बात का एहसास हो जायेगा।मगर आजकल के ज़माने में जहाँ बड़े ही नहीं सीख सके तो हम छोटो से क्या उम्मीद रख सकते है।मैं आज भी उन कहानियों को पढ़ती हूँ।बस एक राजा रानी को छोड़ के बाकी अन्य सारे जिस में भी नैतिकता की बातें सिखाये जाते है उनको पढ़ने के बाद ऐसा लगता है कि संसार कितनी अजीब जगह है।इस भंवर में जिंदा रहने का और इससे बचने का तरीक़ा हमे बचपन में ही सिखाया गया था।फिर भी हम उन अहम् बातों को सीख कर उसे अपनी जीवन शैली में इस्तेमाल नहीं कर पाए।मैं हर रोज़ पढ़ती हूँ,आप लोग भी पढ़िए।आप को पता लग जायेगा कौन सी कहानी से क्या नीति बाहर आया और हमारी जीवन में वो सब कहाँ असर कर सकता है।