Wednesday, 28 September 2016

कुपोषण और इसका शिकार

ज्यादातर लोग कुपोषण अर्थात malnutrition के साथ बच्चों की शारीरिक स्वस्थता के बारे में जानते है और बात करते है।इस कुपोषण का गरीबी से बहुत गहरा ताल्लुक है।मगर कुछ लोग किसी और तरीके से कुपोषित होते है और इसका सीधा ताल्लुक़ात पैसेवाले या नि की अमीरी से है।और इसका शिकार सिर्फ बच्चे ही नहीं बड़े भी है और बहुत भारी मात्रा में।

मैं बात कर रही हूँ एक बहुत ही संजीदा और संवेदनशील विषय के बारे में जिसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता है जो अकेलेपन से गुज़रते है।और इसका नाम है पोर्न (porn)।कुछ लोग इन्हें सिर्फ अपनी computer screen पर देखते है किसी audio और video के ज़रिये।और क्यों की आजकल social media में ऐसे लोग छाये रहते है जिनमे से कुछ का काम होता है लोगों को पकड़ना और बाकियों का काम देखना और उसको निजी जीवन में practise करना।

ज्यादातर घरों में स्त्री और पुरुष दोनों ही ऐसे कुपोषण का शिकार होते रहे और इस तरह घर और परिवार टूट कर बिखड़ते रहते है।हम लोग कहने को तो 18 साल के उम्र में क़ानूनी तौर पे adult होते है मगर adult होने के साथ साथ जो ज़िम्मेदारियां हमे लेनी चाहिए वो नहीं ले पाते।ज़िम्मेदारी मतलब अपनी खुद की।क्यों की सिर्फ ऊंचाई से बढ़ते रहने को ही बड़ा होना नहीं कहते।साथ साथ हमे अपने ऊपर पढ़ने वाली सारी कुप्रभाव को भी अपने आपसे दूर भगाते रहना है।

कानून हमे नैतिक अधिकार देती है मगर उसके साथ कुछ नैतिक ज़िम्मेदारी भी हम पर आती है और उनमें से सबसे अधिक ज़रूरी है हमे अपने आपको मजबूत बनाना।जिस तरह बीमारी से बचने के लिए हम टिकें लगवाते है ठीक उसी तरह इस कुपोषण से बचने का तरीका भी हमे आना चाहिए।आज समाज में चारों तरफ अन्याय और अविचार देखने को मिलते है।जो लोग अच्छे पढ़ लिख कर समाज में अच्छा काम करते है उन्ही की तरह बाकि लोग भी अपनी अपनी हैसियत से कुछ अच्छा करने की हिम्मत रखते है।

ऐसे लोगों को राह भटकने से रोकने के लिए बहुत सारे प्रवंधन की ज़रूरत है।सरकार अपनी तरीके से इन्हें रोज़गार देने की कोशिश कर रहे है,जगह जगह पर vocational courses की भी सुचना दी जाती है।अगर ऐसे में लोगों को सही रास्ते पर लाया जाये तो हमारे प्रधान मंत्री का सपना भी साकार हो सकता है।बीमारी फ़ैलाने वाले कीटाणु तो हमेशा ही कोशिश करते रहेंगे की उनका business फ़ैल जाये मगर उन्हें रोकने के लिए टिंके तो हम ज़रूर लगवा सकते है न!"माना कि अँधेरा घना है मगर दिये जलाना कहाँ मना है?"(श्री नरेंद्र मोदी)

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